हमारे संवाददाता
देहरादून। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में प्रवेश मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। जिसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल ने बताया कि बीती 13 सितम्बर को थाना रायपुर तथा थाना क्लेमेंटाउन पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अलग—अलग अभ्यर्थियों द्वारा अपनी सरकार पोर्टल पर स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनाने हेतु ऑनलाइन आवेदन किये जाने तथा जांच के दौरान उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये दस्तावेज फर्जी पाये जाने के सम्बन्ध में प्राप्त तहरीरों के आधार पर थाना रायपुर व थाना क्लेमनटाउन में अलग—अलग मुकदमें दर्ज किये गये थे। जिसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गयां। एसआईटी जांच के दौरान उक्त सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में अंकित पते गलत पाये गये, जिस पर एसआईटी द्वारा सम्बन्धित शिक्षण संस्थानों में जाकर प्रकरण से जुडे सभी दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया, जिनके अवलोकन से उक्त अभ्यर्थियों के मूल पतों की जानकारी प्राप्त हुई। उक्त प्रकरण में पुलिस द्वारा पूर्व में बीती 21 सितम्बर को मामले में शामिल रूपेश पण्डित तथा अरविन्द कुमार को गिरफ्तार किया गया था तथा आरोपी रूपेश की निशानदेही पर उसके मेरठ स्थित घर से फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के एवज में लिये गये 8 लाख रूपये बरामद किये गये थे।
प्राप्त जानकारी व विवेचना के दौरान प्रकाश में आये साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी द्वारा प्रकरण में संलिप्त एक और आरोपी धीरज श्रीवास्तव को मय वाहन (कार टाटा नेक्सॉन) के साथ गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान वाहन से 558100/— रूपये बरामद हुए। उक्त धनराशि के सम्बन्ध में जानकारी करने पर आरोपी धीरज कुमार श्रीवास्तव द्वारा बताया गया कि बरामद धनराशि उसे रूपेश पंडित द्वारा फ्रीडम फाइटर कोटे से कुछ छात्रों को एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर दी गई थी। पूछताछ में पुलिस टीम को जानकारी हुई कि धीरज श्रीवास्तव, भोपाल में 46 सी सेक्टर इंद्रपुरी थाना पिपलानी में एमबीबीएस वे के नाम से आफिस संचालित करता है जिसके माध्यम से वह विभिन्न प्राईवेट युनिवर्सिटिज में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए, बीकॉम आदि कोर्सों में कमिशन पर एडमिशन दिलवाने का काम करता था। तथा रूपेश पण्डित से उसकी मुलाकात दो साल पहले श्रीमती मंजरी देवी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हिटाणु, उत्तरकाशी में हुई थी तथा उसके बाद से ही दोनो लगातार एक दूसरे के सम्पर्क में थे। आरोपी अरविंद द्वारा अपनी पुत्री व अपने दो अन्य परिचितों के बच्चों के एमबीबीएस में दाखिले के लिये रूपेश से सम्पर्क करने पर रूपेश द्वारा इस सम्बन्ध में अपने साथी धीरज कुमार श्रीवास्तव से बात की थी, जिसके द्वारा उसे अपने एक अन्य साथी से लो मेरिट वाले बच्चों का एमबीबीएस में एडमिशन के बारे जानकारी की गई तो उसके द्वारा उन्हें उत्तराखण्ड में फ्रीडम फाइटर के कोटे में एडमिशन होने की बात बताई गई तथा उन्हें एडमिशन की प्रक्रिया के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए अपने एक परिचित, जिसकी तहसील व कचहरी में अच्छी सेटिंग है, से मिलने हेतु बताया गया।
जिसके बाद धीरज कुमार श्रीवास्तव द्वारा रूपेश पण्डित व अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर तीनो अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनावाये गये थे, जिसके आधार पर उक्त तीनों अभ्यर्थियों द्वारा अलग—अलग मेडीकल कालेजों में एमबीबीएस कोर्स के लिये दाखिला प्राप्त किया था।
फर्जी दस्तावेजों पर एमबीबीएस में प्रवेश मामले में एक और गिरफ्तार


