Home » मित्र पुलिस का कारनामा

मित्र पुलिस का कारनामा

  • किसान ने मरते दम तक नाम लिए, पुलिस ने एफआईआर से मिटा दिए!

उधमसिंहनगर। किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने 26 उन लोगो के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है जिनका नाम उसने सुसाइड करने से पहले बनाई वीडियो में लिया था। लेकिन वीडियो में सुखवंत ने जितने पुलिस वालों के नाम लिए थे, उनमें से एक का भी नाम एफआईआर में नहीं है। यानी मृतक किसान का वीडियो आम लोगो के लिए तो साक्ष्य है लेकिन पुलिस वालो के लिए नहीं,आखिर क्यों? वही गदरपुर भाजपा विधायक अरविंद पांडेय का कहना है कि मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
बीते शनिवार काशीपुर निवासी सुखवंत सिंह द्वारा नैनीताल के गौलापार होटल में खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली गयी थी। आत्महत्या से पूर्व खुशवंत सिंह ने सोशल मीडिया में आकर यह बताया गया था कि उसके साथ प्रापर्टी डीलर व उसके साथियों ने चार करोड़ रूपये की धोखाधड़ी की गयी है। साथ ही उन्होने कहा था कि जब वह इस मामले को लेकर आईटीआई थाने व सम्बन्धित पैगा चौकी सहित एसएसपी कार्यालय गये तो वहंा उनकी सुनवाई करने की बजाये पुलिस द्वारा दूसरे पक्ष से मिलीभगत कर उन्हे प्रताड़ित किया गया।
मामले में पुलिस प्रशासन द्वारा बड़ा खेल करते हुए वीडियो में बताये गये सभी 26 आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जबकि जारी वीडियों में जिन पुलिसकर्मियो पर मृतक द्वारा दूसरे पक्ष से मिलीभगत कर प्रताड़ना के आरोप लगाये गये थे उन्हे पुलिस प्रशासन द्वारा संस्पेंड व लाइन हाजिर कर दिया गया है। अब सवाल यह है कि क्या मृतक किसान सुखवंत सिंह द्वारा जारी वीडियों में जिन पुलिसकर्मियों पर गम्भीर आरोप लगाये गये है वह आरोपी नहीं है? अब पुलिस का कहना है कि पुलिस वालो के खिलाफ अलग से कार्रवाई की गई है। सोचनीय सवाल यह है कि यह किस तरह की कार्यवाही है जिसमें मृतक द्वारा जारी वीडियों में खुले आम कुछ पुलिस अधिकारियों व कर्मियों पर प्रताड़ना के आरोप लगाये जा रहे है उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गयी है? ऐसे में क्या मृतक किसान को इंसाफ मिल पायेगा यह एक बड़ा सवाल है। वहीं गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय का कहना है कि मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *