20 नवंबर से शुरू हो रहा है तीन दिवसीय मदमहेश्वर मेला
संवाददाता
रूद्रप्रयाग। द्वितीय केदार श्री मद्महेश्वर के कपाट आज सुबह 8 बजे शीतकाल हेतु मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी स्वाति नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में बंद हो गये है। इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु तथा बीकेटीसी कर्मचारी अधिकारी, वनविभाग एवं प्रशासन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आज सुबह कपाट बंद होने की प्रक्रिया के अंतर्गत ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर खुला जिसके उपरांत श्रद्धालुओं ने दर्शन किये और पूजा—अर्चना अर्चना के बाद सात बजे से कपाट बंद ही प्रक्रिया शुरू हो गयी। इसके पश्चात पुजारी शिवलिंग ने बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी/ कार्यपालक मजिस्ट्रेट विजय प्रसाद थपलियाल, बीकेटीसी सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान एवं पंच गौंडारी हकहकूकारियों की उपस्थिति में श्री मदमहेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप दिया। इसके बाद प्रातः आठ सात बजे मंदिर के कपाट श्री मदमहेश्वर के जय घोष के साथ शीत काल हेतु बंद हो गये।
कपाट बंद होने के बाद श्री मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली ने अपने भंडार का निरीक्षण तथा मंदिर की परिक्रमा पश्चात ढ़ोल— दमाऊं के साथ प्रथम पड़ाव गौंडार हेतु प्रस्थान किया। श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने अपने संदेश में द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने के अवसर पर श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी। कपाट बंद होने के अवसर पर बीकेटीसी सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान,बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, प्रभारी अधिकारी यदुवीर पुष्पवान,पंच गौंडारी हकहकूकधारी पूर्व प्रधान वीरसिंह पंवार, सरपंच फतेह सिंह, शिवानन्द पंवार,दीपक पंवार सहित कई लोग मौजूद रहे।
द्वितीय केदार श्री मद्महेश्वर मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए हुए बंद


