- धराली क्षेत्र की सड़कें 20 दिन में भी नहीं सुधरी
- ग्रामीण क्षेत्रों में आम जरूरत की वस्तुएं भी नहीं
- एक सप्ताह तक जारी रहेगा मानसून का कहर
देहरादून। उत्तराखंड राज्य इन दिनों आसमानी आपदा की मार से बेजार है। डरे सहमें लोगों के मन में अब बस एक ही सवाल है कि आपदा की मार झेल रहे लोगों के जख्म कब तक और कैसे भर पाएंगे। अभी धराली आपदा के प्रभावितों तक शासन—प्रशासन सहायता पहुंचा भी नहीं पाया था कि 2 दिन पूर्व थराली में बादल फटने से भारी तबाही देखने को मिली। भले ही यहां अभी तक एक मृत्यु और एक लापता के रूप में जनहानि धराली की तुलना में कम हो लेकिन चमोली के दो गांवों में दो से तीन फीट तक मलवा आ जाने से जनजीवन संकट में आ गया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस आपदा के कारण जन आपूर्ति लाइन के कट जाने के कारण लोगों को जिस तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है उसका दर्द वह खुद ही समझ सकते हैं। सरकारी दावे भले ही कुछ भी किये जा रहे हो लेकिन धराली आपदा को 20 दिन बीत चुके हैं लापता लोगों की तलाश की बात बहुत दूर है इस क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों और मुख्यालय से टूट जाने के कारण आम जरूरत की वस्तुओं की आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है कई क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को सुचारू नहीं किया जा सका है तो कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति अभी भी सुचारू नहीं हो सकी है। आपदा के 20 दिन बाद भी गंगोत्री हाईवे को सुचारू नहीं किया जा सका है। वहीं अब आज मिली ताजा जानकारी के अनुसार नालूना के पास नया भूस्खलन जोन सक्रिय होने से पहाड़ दरक रहा है। पूरी पहाड़ी के सड़क पर गिर जाने से मार्ग बुरी तरह से बंद हो गया है वहीं यमुनोत्री हाईवे पर भूस्खलन के कारण यातायात ठप हो गया है।
उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली क्षेत्र की छोटी बड़ी कुल 60 सड़के बंद है। ऐसी स्थिति में अगर राज्य के इन पर्वतीय जिलों में कोई बड़ी घटना घटित होती है तो आपदा के समय प्रभावितों की सहायता के लिए पहुंच पाना मुश्किल हो जाएगा। इसमें कोई संदेह नहीं है राज्य में हो रही लगातार बारिश के कारण हाल खराब है। आगामी कुछ घटोंं के लिए राज्य की राजधानी दून सहित 6 जिलों में भारी से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है तथा बाकी जिलों में बारिश जारी है। नैनीताल में अभी भारी बारिश हो रही है। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। नाले उफान पर हैं मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन द्वारा मुनादी करके लोगों को सतर्क किया जा रहा है कि वह सावधानी बरते तथा नदी नालोंं से दूर रहे। ऐसी स्थिति में सड़कों को खोलने व उनकी मरम्मत का काम भी भला कैसे संभव है? चिंता का विषय यह है कि अभी इस आफत से कम से कम एक सप्ताह तो निजात मिल पाना मुश्किल है।


